कब प्यास बुझाई जाएगी कब जाम पिलाया जाएगा

कब प्यास बुझाई जाएगी कब जाम पिलाया जाएगा
कब दर्द के मारों को आका तैयबा में बुलाएगा।
खुशबू भी लगाई जाएगी दुल्हा भी बनाया जाएगा
जिस वक्त जनाज़ै को मेरे कांधे पे उठाया जाएगा।
जो बिखरे हुए हैं करबल में सरकार के गुलशन के गुंचे
उन सारे मुक़द्दस फूलों से जन्नत को सजाया जाएगा।
चेहरे को खुला रखना मेरे है मेरी वसीयत ऐ लोगों
कहते हैं लहेद में आका का दीदार कराया जाएगा।
बिन देखे ही जब ये आलम है उस वक्त का आलम क्या होगा
सरकार के चेहरा ए अक्दस को जिस वक्त दिखाया जाएगा।
जितने हैं नबी वो सबके सब महशर में मनाएंगे रब को
एक ज़ात ए मुहम्मद है जिसको महशर में मनाया जाएगा।

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