ख़्वाब   में   मेरे  कभी  तशरीफ़  लाएं   ग़ौसे पाक

 

ख़्वाब   में   मेरे  कभी  तशरीफ़  लाएं   ग़ौसे पाक
मेरे  ख़्वाबीदा   मुक़द्दर   को    जगाएं   ग़ौसे पाक

अपने  पाए नाज़ की  बरकत से करके मुस्तफ़ीज़
मेरे  घर  को  भी  कभी  जन्नत  बनाएं  ग़ौसे पाक

कोई क़ूव्वत उसको दुनिया की गिरा सकती नहीं
अपने फ़ज़्ले ख़ास से जिस को उठाएं ग़ौसे पाक

हो   गई   बाबे इजाबत   पर   रसाई   उनकी   भी
वास्ते  से  जो  तेरे   की   हैं   दुआएं   ग़ौसे   पाक

बहरे सरकारे दो आलम ﷺ हम ग़रीबों की तरफ़
भेज  दो  अब्रे  सख़ावत   की   घटाएँ   ग़ौसे पाक

आरज़ू  रखते  हैं   हम   येह   आपके   दरबार  में
आप  ही  की  मनक़बत आकर सुनाएं ग़ौसे पाक

वोह तसर्रुफ़ रब्ब عَزّوَجَلْ ने बख़्शा है उन्हें इक आन में
जिस  जगह  चाहें  वहां  पर आएं जाएं ग़ौसे पाक

छू  नहीं  सकती  उसे  ख़ुर्शीदे  मह़शर  की तपिश
वोह  जिसे  मिफ़्ताह़  दामन  में छुपाएं ग़ौसे पाक

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