जिंदगानी का कोई भरोसा नहीं

जिंदगानी का कोई भरोसा नहीं
और अभी तक मदीने को देखा नहीं।
सारी दुनिया उन्ही के तो साये में है
ये अलग बात है उनका साया नहीं।
मसलाके आलहज़रत पे चलते रहो
इस से अच्छा कोई और रस्ता नहीं।
महका होता न उनका पसीना अगर
कोई गुल कोई गुलशन महकता नहीं।
नजदिया जान लेता रज़ा को अगर
हर कदम पे ज़लील ऐसा होता नहीं।
ताहिर उस दिल को दिल ही न समझ करो
जिसमे दर्द उनकी चाहत का उठा नहीं।

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