है दिल को मिरे जुस्तजू ए मुहम्मद।

 

है दिल को मिरे जुस्तजू ए मुहम्मद।
मुझे जाने दो अब तो सू ए मुहम्मद।

न दौलत की हाजत न शौहरत की चाहत।
मुझे है फ़क़त आर्जू ए मुहम्मद।

यूँ अफ़ज़ल है मेराज की शब के इसमें।
ख़ुदा से हुई गुफ़्तगू ए मुहम्मद।

निगाहों में है उनके रोज़े का मन्ज़र।
ख़यालों में है जब से रु ए मुहम्मद।

करूँ क्यों न मिदह़त पसीने की उनके।
गुलाबों से अफ़ज़ल है बू ए मुहम्मद।

ह़बीब ए ख़ुदा हैं वो शाहे उमम हैं।
ये है इज़्ज़त ओ आबरू ए मुहम्मद।

फ़राज़ अब तो ये ही तमन्ना है दिल की।
निगाहों से देखूँ मैं कू ए मुह़म्मद।

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