AISA BANNA SAWARNA MUBARAK TUMHE

AISA BANNA SAWARNA MUBARAK TUMHE

 

Aisa Ban”na Sawarna Mubarak Tumhe
Kam Se Kam Itna Kehna Hamara Karo

Chand Sharmayega Chandani Raat Me
Youn Na Zulfo Ko Apni Sawara Karo

ऐसा बनना सवरना मुबारक तुम्हे
कम से कम इतना कहना हमारा करो
चाँद शरमाएगा चांदनी रात में
यूं ना ज़ुल्फो को अपनी संवारा करो

 

Ye Tabassum Ye Aariz Ye Roshan Jabei”n
Ye Ada Ye Nigaahei”n Ye Zulfe Hasee”n
Aaine Ki Nazar Lag Na Jaye Kahi”n
Jaan-E-Jaa”n Apna Sadqa Utara Karo

ये तबस्सुम ये आरिज़ ये रोशन ज़बी
ये अदा ये निगाहें ये ज़ुल्फे हँसी
आईने की नज़र लग ना जाए कहीं
जान ए जाँ अपना सदका उतारा करो

 

Dil To Kya Cheez Hai Jaan Se Jayenge
Mout Aane Se Pehle Hi Mar Jayenge
Ye Ada Dekhne Wale Lut Jayenge
Youn Na Has Has K DilBar Ishara Karo

दिल तो क्या चीज़ है जान से जायेंगे
मौत आने से पहले ही मर जायेंगे
ये अदा देखने वाले लुट जायेंगे
यूं ना हस हस के दिलबर इशारा करो

Fikr-E-Uqba Ki Masti Utar Jayegi
Tauba Tooti To Kismat Sawar Jayegi
Tum Ko Dunya Me Jannet Nazar Aayegi
Sheikh Ji Mai-Kade Ka Nazara Karo

फ़िक़्र ए उक़बा की मस्ती उतर जाएगी
तौबा टूटी तो किस्मत संवर जाएगी
तुमको दुनिया में जन्नत नज़र आएगी
शैख़ जी मयकदे का नज़ारा करो

Kaam Aaye Na Mushkil Me Koi Yaha”n
Matlabi Dost Hain Matlabi Yaar Hain
Is Jahan Me Nahi Koi Ahl-E-Wafa
Ai “FANA” Is Jaha”n Se Kinara Karo

काम आए ना मुश्किल में कोई यहाँ
मतलबी दोस्त हैं मतलबी यार हैं
इस जहाँ में नहीं कोई अहल ए वफ़ा
ऍ “फ़ना ” इस जहाँ से किनारा करो

 

 

 

मुबारक रुखसत हो के मुस्तफा से मुस्तफा आये.!
खुदा का शुक्र है क़ाबे से मेहमाने खुदा आये.!!

अदाए फर्ज करके फिर गए क़ाबे के क़ाबा को.!
वंहा से दौलते कौनैन लेकर मरहबा आए.!!

ये कैसी रहमतों की बदलीयां छाई जमाने पर.!
ज्यारत करके शायद मुस्तफा की मुस्तफा आए.!!

मसर्रत ही मसर्रत हो रही है अहले सुन्नत को.!
अदाए फर्ज करके आज उनके पेशवा आए.!!

मुझे मुश्कील है एै आका, पहुंचना दस्ते तैबा मे.!
जो तुम चाहो तो एै मौला ये सिब्तैन रज़ा आए.!!

✍🏻हुज़ुर अमीने शरीअत अल्लामा सिब्तैन रज़ा खां अलैहिर्रहमा.

✍🏻मुहम्मद जुनैद रज़ा अज़हरी

 

 

☝🏻अक़ीदा :- फ़िरिश्ते अनगिनत हैं उनकी गिनती वही जाने जिसने उन्हें पैदा किया है और अल्लाह के बताये से उसके प्यारे महबूब जानते हैं वैसे चार फिरिश्ते बहुत मशहूर हैं :

1- हज़रते जिब्रईल अलैहिस्सलाम
2- हज़रते मीकाईल अलैहिस्सलाम
3- हज़रते इसराफ़ील अलैहिस्सलाम
4- हज़रते इजराईल अलैहिस्सलाम

यह फ़िरिश्ते दूसरे सारे फ़िरिश्तों से अफ़जल हैं। किसी फिरिश्ते के साथ कोई हल्की सी गुस्ताखी भी कुफ़्र है। जाहिल लोग अपने किसी दुश्मन या ऐसे को देखकर जिस पर गुस्सा आये उसे देखते ही कहते है कि ‘मलकुल मौत या इज़राईल’ आ गया। लेकिन उन जाहिलों को खबर नहीं कि यह कलिमा कुफ़्र के करीब है।

📕 बहारे शरीअत, हिस्सा 1, सफा 25

📮जारी रहेगा…..
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