Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Lyrics

Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Lyrics

MUJH PE MAULA KA KARAM HAI NAAT LYRICS

Sallay Ala Nabiyenna Sallay Ala Muhammadin
Sallay Ala Shafiyena Sallay Ala Muhammadin

Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Unki Naatein Parhta Hoon
Daaman Apna Rab Ki Rehmat Se Mein Har Dum Bharta Hoon

Mein Sadqay Ya RasoolAllah
Mein Sadqay Ya HabibAllah

Dhoom Unn Ki Naa Khuwaani Ki Machatay Jayeinge
Ya RasoolAllah Ka Na’ra Lagatay Jayeinge

Na’t Khuwaani Maut Bhi Hum Se Chura Sakti Nahi
Qabr Mein Bhi Mustafa Ke Geet Gaatay Jayeinge

Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Unki Naatein Parhta Hoon
Daaman Apna Rub Ki Rehmat Se Mein Har Dum Bharta Hoon

Mein Sadqay Ya RasoolAllah
Mein Sadqay Ya HabibAllah

Kitna Bara Hai Mujh Pe Ye Ahsaan-e-Mustafa
Kehte Hain Log Mujh Ko Sana Khuwaan-e-Mustafa

Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Unki Naatein Parhta Hoon
Daaman Apna Rub Ki Rehmat Se Mein Har Dum Bharta Hoon

Mein Sadqay Ya RasoolAllah
Mein Sadqay Ya HabibAllah

Beher-e-Bakhshish Pass Apne Kuch Nahi Iske Siva
Umar Bhar Naatein Suneinge Aur Sunatay Jayeinge

Naat Khuwani Ka Nasha Nas Nas Mein Aisa Chah Gaya
Qabr Mein Bhi Geet Ubaid Ab Mustafa Ke Gayeinge

Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Unki Naatein Parhta Hoon
Daaman Apna Rub Ki Rehmat Se Mein Har Dum Bharta Hoon

Mein Sadqay Ya RasoolAllah
Mein Sadqay Ya HabibAllah

Koi Guftugu Ho Lab Per Tera Naam Agaya Hai
Tera Zikr Kartay Kartay Ye Maqaam Agaya Hai

Jissay Peekay Sheikh Sa’di Balaghal Ula Pukarein
Mere Dast-e-Na Tawaan Mein Wohi Jaam Agaya Hai

Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Unki Naatein Parhta Hoon
Daaman Apna Rub Ki Rehmat Se Mein Har Dum Bharta Hoon

Mein Sadqay Ya RasoolAllah
Mein Sadqay Ya HabibAllah

Tera Wasf Bayaan Ho Kisse Teri Kon Karega Barayei
Iss Gard-e-Safar Mein Gum Hai Jibreel-e-Ameen Ki Rasayei

Aey Raza Khud Sahib-e-Qur’an Hai Madaah-e-Rasool
TUjhse Kab Mumkin Hai Phir Midhat RasoolAllah Ki

Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Unki Naatein Parhta Hoon
Daaman Apna Rub Ki Rehmat Se Mein Har Dum Bharta Hoon

Mein Sadqay Ya RasoolAllah
Mein Sadqay Ya HabibAllah

Jitna Diya Sarkar Ne Mujhko Itni Meri Auqaat Nahi
Ye Tou Karam Hai Unka Warna Mujhe Mein Tou Aisi Baat Nahi

Ghaur Tou Kar Sarkar Ki Mujhper Kitni Khaas Inayat Hai
Kausar Tou Hai Unka Sana Khuwaan Ye Ma’mooli Baat Nahi

Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Unki Naatein Parhta Hoon
Daaman Apna Rub Ki Rehmat Se Mein Har Dum Bharta Hoon

Mein Sadqay Ya RasoolAllah
Mein Sadqay Ya HabibAllah

Gham Nahi Chordey Ye Saara Zamana Mujhko
Mere Aaqa Tou Hain Seenay Se Laganay Ke Liye

Bakhsh Dei Naat Ki Daulat Mere Aaqa Ne Mujhe
Kitnay Pyara Waseela Sarkar Ko Paanay Ke Liye

Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Unki Naatein Parhta Hoon
Daaman Apna Rub Ki Rehmat Se Mein Har Dum Bharta Hoon

Mein Sadqay Ya RasoolAllah
Mein Sadqay Ya HabibAllah

Seenay Mein Bhara Hai Teri Naaton Ka Khazana
Aalam Mein Lutata Hoon Kamayei Tere Dar Ki

Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Unki Naatein Parhta Hoon
Daaman Apna Rub Ki Rehmat Se Mein Har Dum Bharta Hoon

Mein Sadqay Ya RasoolAllah
Mein Sadqay Ya HabibAllah

Sadayein Duroodon Ki Aatei Raheingi
Jinhein Sunke Dil Shaad Shaad Hota Rahega
Khuda Ahl-e-Sunnat Ko Aabaad Rakhay
Muhammad Ka Milad Hota Rahega

Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Unki Naatein Parhta Hoon
Daaman Apna Rub Ki Rehmat Se Mein Har Dum Bharta Hoon

Mein Sadqay Ya RasoolAllah
Mein Sadqay Ya HabibAllah

Ab Ke Baras Bhi Hoonton Pe Unki Sana Rahei
Ab Ke Baras Bhi Wajd Mein Ghar Ki Fiza Rahei
Ab Ke Baras Bhi Madha Ke Khiltay Rahay Gulab
Ab Ke Baras Bhi Kasht-e-Dil-o-Jaan Sawar Rahi
Ab Ke Baras Bhi Lab Pe Taraana Tha Naat Ka
Ab Ke Baras Bhi Chaar Sou Mehki Saba Rahi
Ab Ke Baras Bhi Sheher-e-Sukhan Mein Thei Ronaqein
Ab Ke Baras Bhi Raqs Mein Meri Sada Rahi
Ab Ke Baras Bhi Shayr-O-Sukhan Se Theu Dosti
Ab Ke Baras Bhi Doston Hamd-O-Sana Rahei
Ab Ke Baras Bhi Tazkira-e-Mustafa Rahei
Ab Ke Baras Bhi Guftugu Sallay Ala Rahei

Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Unki Naatein Parhta Hoon
Daaman Apna Rub Ki Rehmat Se Mein Har Dum Bharta Hoon

Mein Sadqay Ya RasoolAllah
Mein Sadqay Ya HabibAllah

Awaaz Ubaid Teri Bafaizan-e-Naat Hee
Seenon Mein Aashiqan-e-Nabi Ke Utar Gayei

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ | मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! 

Mujh Pe Maula Ka Karam Hai Un Ki Naatein Padhta Hun | Main Sadqe, Ya Rasoolallah !

स़ल्ले अ़ला नबिय्येना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला शफ़ीएना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ

मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !
मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !

धूम उन की नात-ख़्वानी की मचाते जाएँगे
‘या रसूलल्लाह’ का ना’रा लगाते जाएँगे

नात-ख़्वानी मौत भी हम से छुड़ा सकती नहीं
क़ब्र में भी मुस्तफ़ा के गीत गाते जाएँगे

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ

मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !
मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ

कितना बड़ा है मुझ पे ये एहसान-ए-मुस्तफ़ा
कहते हैं लोग मुझ को सना-ख़्वान-ए-मुस्तफ़ा

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ

मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !
मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ

तेरे बख़्शिश पास अपने कुछ नहीं इस के सिवा
उम्र भर नातें सुनेंगे और सुनाते जाएँगे

नात-ख़्वानी का नशा नस नस में ऐसा छा गया
क़ब्र में भी गीत, उबैद ! हम मुस्तफ़ा के गाएँगे

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ

मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !
मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !

कोई गुफ़्तुगू हो लब पर तेरा नाम आ गया है
तेरा ज़िक्र करते करते ये मक़ाम आ गया है

जिसे पी के शैख़ साअ’दी ‘बलग़ल उ़ला’ पुकारें

बलग़ल उ़ला बिकमालिहि, कशफ-द्दुजा बिजमालिहि
हसुनत जमीउ़ ख़िसालिहि, स़ल्लू अ़लयहि व आलिहि

जिसे पी के शैख़ साअ’दी ‘बलग़ल उ़ला’ पुकारें
मेरे दस्त-ए-ना-तवाँ में वही जाम आ गया है

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ

मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !
मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ

जितना दिया सरकार ने मुझ को, उतनी मेरी औक़ात नहीं
ये तो करम है उन का वर्ना मुझ में तो ऐसी बात नहीं

ग़ौर तो कर, सरकार की तुझ पर कितनी ख़ास इ’नायत है
कौसर ! तू है उन का सना-ख़्वाँ, ये मा’मूली बात नहीं

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ

मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !
मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !

तेरा वस्फ़ बयाँ हो किस से, तेरी कौन करेगा बड़ाई
इस गर्द-ए-सफ़र में गुम है जिब्रील-ए-अमीं की रसाई

ए रज़ा ! ख़ुद साहिब-ए-क़ुरआँ है मद्दाह-ए-हुज़ूर
तुझ से कब मुमकिन है फिर मिदहत रसूलुल्लाह की

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ

मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !
मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !

ग़म नहीं छोड़ दे ये सारा ज़माना मुझ को
मेरे आक़ा तो हैं सीने से लगाने के लिए

बख़्श दी नात की दौलत मेरे आक़ा ने मुझे
कितना प्यारा है वसीला सरकार को पाने के लिए

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ

मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !
मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ

सीने में भरा है तेरी नातों का ख़ज़ाना
आ’लम में लुटाता हूँ कमाई तेरे दर की

मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !
मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !

सदाएँ दुरूदों की आती रहेंगी, जिन्हें सुन के दिल शाद होता रहेगा
ख़ुदा अहल-ए-सुन्नत को आबाद रखे, मुहम्मद का मीलाद होता रहेगा

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ

मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !
मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !

अब के बरस भी होंटों पे उन की सना रही
अब के बरस भी वज्द में घर की फ़ज़ा रही

अब के बरस भी मदह के खिलते रहे गुलाब
अब के बरस भी किश्त-ए-दिल-ओ-जाँ सिवा रही

अब के बरस भी लब पे तराना था नात का
अब के बरस भी चार-सू महकी सबा रही

अब के बरस भी शहर-ए-सुख़न में थी रौनक़ें
अब के बरस भी रक़्स में मेरी सदा रही

अब के बरस भी शेर-ओ-सुख़न से थी दोस्ती
अब के बरस भी, दोस्तो ! हम्द-ओ-सना रही

अब के बरस भी तज़्किरा-ए-मुस्तफ़ा रहा
अब के बरस भी गुफ़्तुगू स़ल्ले अ़ला रही

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ

आवाज़, उबैद ! तेरी ब-फ़ैज़ान-ए-नात ही
सीनों में आशिक़ान-ए-नबी के उतर गई

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ

मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !
मैं सदक़े, या रसूलल्लाह ! मैं सदक़े, या हबीबल्लाह !

मुझ पे मौला का करम है उन की नातें पढ़ता हूँ

नात-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी

مجھ پہ مولا کا کرم ہے اُن کی نعتیں پڑھتا ہوں

مجھ پہ مولا کا کرم ہے اُن کی نعتیں پڑھتا ہوں
دامن اپنا رب کی رحمت سے میں ہر دم بھرتا ہوں

میں صدقے یا رسولﷲ
میں صدقے یا حبیبﷲ

دھوم اُن کی نعت خوانی کی مچاتے جائینگے
یا رسولﷲ کا نعرہ لگاتے جائینگے

نعت خوانی موت بھی ہم سے چھوڑاسکتی نہیں
قبر میں بھی مصطفی کے گیت گاتے جا ئینگے

مجھ پہ مولا کا کرم ہے اُن کی نعتیں پڑھتا ہوں
دامن اپنا رب کی رحمت سے میں ہر دم بھرتا ہوں

میں صدقے یا رسولﷲ
میں صدقے یا حبیبﷲ

صدائیں درودوں کی آتی رہیں گی
جنہیں سن کر دل شاد ہوتا رہے

خدا اہلِ سنت کو آبا د رکھے
محمد کا میلا د ہوتا رہےگا

میں صدقے یا رسولﷲ
میں صدقے یا حبیبﷲ

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