बसी है जब से वो तसवीर-ए-यार आँखों में

बसी है जब से वो तसवीर-ए-यार आँखों में सिमट सी आई है फ़स्ले बहार आँखों में ज़मीने तैयबा की मिट्टी बने मेरा सुरमा रहे हमेशा नबी का दयार आँखों में मेरी निगाहें सरे अर्श जा के ठहरेंगी मलूं जो नअ़ले नबी बार बार आँखों में वह ला-मकां के मुसाफ़िर बने शबे असरा खुदा के जल्वे … Read more