भीनी सुहानी सुब्ह़ में ठन्डक जिगर की है
भीनी सुहानी सुब्ह़ में ठन्डक जिगर की हैकलियां खिलीं दिलों की हवा यह किधर की है खुबती हुई नज़र में अदा किस सह़र की हैचुभती हुई जिगर में सदा किस गजर की है डालें हरी हरी हैं तो बालें भरी भरीकिश्ते अमल परी है यह बारिश किधर की है हम जाएं और क़दम से लिपट … Read more