चल कलम अब हम्द ए रब मकसूद है
चल कलम अब हम्द ए रब मकसूद है तेरा मेरा सब का जो माबूद है है वही शाहिद वही मशहूद है नूर उसका हर जगह मौजूद है उसने ही हमको बख्शे हैं हमको मुस्तफा ये न हो तो ज़िंदगी बे सूद है यूँ तो है कुरआन हिदायत की किताब पर किसी का तज़किरा मकसूद है … Read more