चमका माह-ए-नूर का हिलाल, मरहबा !
या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा ! या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा ! बेकसों से है जिन्हें प्यार वोही आए हैं जो दो आलम के हैं ग़म-ख़्वार वोही आए हैं या रसूलल्लाह ! मरहबा मरहबा ! या हबीबल्लाह ! मरहबा मरहबा ! एक नज़र आस्माँ पे डाल, मरहबा ! चमका माह-ए-नूर का हिलाल, मरहबा ! या … Read more