हुज़ूर मेरी तो सारी बहार आपसे है
हुज़ूर मेरी तो सारी बहार आपसे है मैं बेक़रार था मेरा क़रार आपसे है मेरी तो हस्ती ही क्या है मेरे ग़रीब नवाज़ जो मिल रहा है मुझे सारा प्यार आपसे है कहाँ वो अर्ज़-ए-मदीना कहाँ मेरी हस्ती ये हाज़िरी का सबब बार बार आपसे है सियाह कार हूँ आक़ा बड़ी नदामत है क़सम ख़ुदा … Read more