लब पर ना’त-ए-पाक का नग़्मा कल भी था और आज भी है

  लब पर ना’त-ए-पाक का नग़्मा कल भी था और आज भी है मेरे नबी से मेरा रिश्ता कल भी था और आज भी है ओर किसी जानिब क्यूँ जाएँ, ओर किसी को क्यूँ देखें अपना सब कुछ गुंबद-ए-ख़ज़रा कल भी था और आज भी है पस्त वो कैसे हो सकता है जिस को हक़ … Read more