क़ल्ब को उसकी रुइयत की है आरज़ू

क़ल्ब को उसकी रुइयत की है आरज़ू क़ल्ब को उसकी रुइयत की है आरज़ू जिसका जलवा है ‘आलम में हर चार-सू बल्कि ख़ुद नफ़्स में है वो सुब्हानहु ‘अर्श पर है मगर ‘अर्श को जुस्तजू अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु, अल्लाहु अल्लाहु ‘अर्श-ओ-फ़र्श-ओ-ज़मान-ओ-जिहत ऐ ख़ुदा! जिस तरफ़ देखता हूँ है जलवा तेरा ज़र्रे-ज़र्रे की आँखों में तू … Read more