तेरे दयार के एहसान भूलते ही नहीं

तेरे दयार के एहसान भूलते ही नहीं इनायतों के वो सामान भूलते ही नहीं वो जालियां, वो दरीचे, वो मिंबर ओ मेहराब वो दर, वो रौज़ा, वो दरबान भूलते ही नहीं जबीं पे नूर, नज़र में अदब, दिलों में गुदाज़ हरेम-ए-नाज़ के मेहमान भूलते ही नहीं बा वक़्त-ए-इज़्न-ए-हुज़ूरी वो आँसुओं की तड़प वो आरज़ुएँ वो … Read more