आज मुहम्मद आए मोरे घर लिरिक्स

 

आज मुहम्मद आए मोरे घर
सल्ले अला की धूम है घर घर

आँखों में माज़घ का सुरमा
सर पर ताज-ए-वरफ़अना का
हुस्न-ए-मुजस्सम अल्लाहु अकबर

सुब्ह-ए-अज़ल है मुखड़ा उनका
शाम-ए-अवध है ज़ुल्फ़ का साया
उनसे हुआ हर क़ल्ब मुनव्वर

महंदी लगाऊँ घर को सजाऊँ
मैं आँगन में नाचूँ गाऊँ
तन मन वारूँ उनके चरण पर

आओ सखियों मिलकर गाएँ
अपने पिया का जश्न मनाएँ
सल्ले अला की धूम है घर घर

शायर: अंजुम बेकस

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