इक़रार है सरकार, गुनहगार बहुत हूँ
महशर में शफ़ाअत का तलबगार बहुत हूँ
हुस्न-ए-अमल कुछ नहीं ऐ शाफ़ा-ए-महशर
बख़्शिश की तलब है कि ख़ता-कार बहुत हूँ
लिल्लाह करम कीजिये सरकार-ए-दो-आलम
इसियाँ की तलातुम में गिरफ़्तार बहुत हूँ
हासिल हों मुरादें सभी, कर दें जो इशारा
मोहताज-ए-करम सय्यद-ए-अबरार बहुत हूँ
सरकार संभालो मुझे अब दोनों जहाँ में
दुनिया की बलाओं में गिरफ़्तार बहुत हूँ
हसरत है ये ‘मंज़र’ की, शहा फिर से बुलालो
मुफ़लिस हूँ बहुत, बेकस-ओ-नादार बहुत हूँ