अल अमान कहर है या गौस वो तीखा तेरा

अल अमान कहर है या गौस वो तीखा तेरा मर के भी चैन से सोता नही मारा तेरा बादलों से कहीं रूकती हैं कडकती बीजली ढालेे छंट जाती हैं। उटता है जो तबघा तेरा अक्स का देख के मुॅह ओर बिपर जाता है चार आइना के बल का नहीं नेजा तेरा कोहे सर मुख हो … Read more