बहार-ए-जाँ-फ़िज़ा तुम हो नसीम-ए-गुलसिताँ तुम हो
बहार-ए-जाँ-फ़िज़ा तुम हो, नसीम-ए-गुलसिताँ तुम हो बहार-ए-बाग़-ए-रिज़वाँ तुम से है, ज़ेब-ए-जिनाँ तुम हो ख़ुदा की सल्तनत का दो जहाँ में कौन दूल्हा है तुम ही तुम हो, तुम ही तुम हो, यहाँ तुम हो, वहाँ तुम हो हक़ीक़त से तुम्हारी जुज़ ख़ुदा और कौन वाक़िफ़ है कहे तो क्या कहे कोई, चुनीं तुम हो, चुनाँ … Read more