छोड़ फ़िक्र दुनिया की, चल मदीने चलते हैं

Chor Fikr Duniya Ki Chal Madine Chalte Hain Naat Lyrics

छोड़ फ़िक्र दुनिया की, चल मदीने चलते हैं मुस्तफ़ा ग़ुलामों की क़िस्मतें बदलते हैं छोड़ फ़िक्र दुनिया की रहमतों के बादल के साए साथ चलते हैं मुस्तफ़ा के दीवाने घर से जब निकलते हैं छोड़ फ़िक्र दुनिया की हम को रोज़ मिलता है सदक़ा प्यारे आक़ा का उन के दर के टुकड़ों पर ख़ुश-नसीब पलते … Read more