दिल में इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगन
दिल में इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगन, रूह तड़पती रहे दिल मचलता रहे। ज़िंदगी का मज़ा है कि हर साँस से, या मुहम्मद मुहम्मद निकलता रहे। या मुहम्मद मुहम्मद मैं कहता रहा, नूर के मोतियों की लड़ी बन गई। आयतों से मिलाता रहा आयतें, फिर जो देखा तो नात-ए-नबी बन गई। जो भी आँसू बहे … Read more