जब गुंबद-ए-ख़िज़रा पे वो पहली नज़र गई
जब गुंबद-ए-ख़िज़रा पे वो पहली नज़र गई आँखों के रास्ते मेरे दिल में उतर गई सर ख़म था, लब ख़मोश थे, आँखें थीं अश्कबार इक साअत-ए-बेदार थी जो कि गुज़र गई दिल भी है शाद शाद, तबीयत है पुर-बहार लगता है आज मेरी मदीने ख़बर गई बरसी थी इस क़दर कि नहा सा गया उधर … Read more