पड़े मुझ पर न कुछ उफ्ताद या गौस

पड़े मुझ पर न कुछ उफ्ताद या गौस, मदद पर हो तेरी इमदाद या गौस। उठे तेरी तरफ बाद फना खाक, मेरी मिट्टी न हो बरबाद या गौस। मेरे दिल में बसे जलवे तुम्हारे, ये विराना बने बगदाद या गौस। ना भूलूं भूल कर भी याद तेरी, ना याद आए किसी की याद या गौस। … Read more