तेरी जालिओं के नीचे तेरी रहमतों के साये
तेरी जालिओं के नीचे, तेरी रहमतों के साये जिसे देखनी हो जन्नत, वो मदीना देख आये तैबा को जानेवाले, तुझे देता हूँ दुआएं दर-ए-मुस्तफ़ा पे जाके, तू जहाँ को भूल जाये रौज़े के सामने मैं, यह दुआएं मांगता था मेरी जान निकल तो जाये, यह समां बदल ना जाये लो चला हूँ … Read more