तेरी जालिओं के नीचे तेरी रहमतों के साये

तेरी जालिओं के नीचे, तेरी रहमतों के साये

जिसे देखनी हो जन्नत, वो मदीना देख आये

 

तैबा को जानेवाले, तुझे देता हूँ दुआएं

दर-ए-मुस्तफ़ा पे जाके, तू जहाँ को भूल जाये

 

रौज़े के सामने मैं, यह दुआएं मांगता था

मेरी जान निकल तो जाये, यह समां बदल ना जाये

 

लो चला हूँ मैं लहद में, मेरे मुस्तफ़ा से कह दो

के हवा तेरी गली की, मुझे छोड़ने को आये

 

वही ग़मगुसार मेरा, वो ज़हूर-ए-यार मेरा

मेरी क़ब्र पर जो आये, नात-ए-नबी सुनाये

 

तेरी जालिओं के नीचे, तेरी रहमतों के साये

जिसे देखनी हो जन्नत, वो मदीना देख आये

 

Leave a Comment