कोई दुनिया-ए-अता में नहीं हमता तेरा
कोई दुनिया-ए-अता में नहीं हमता तेरा हो जो हातिम को मुयस्सर ये नज़ारा तेरा। कह उठे देख के बख्शीश में ये रुतबा तेरा, वाह! क्या जुदो करम है शहे बतहा तेरा। नहीं सुनता ही नहीं माँगने वाला तेरा, कुछ बशर होने के नाते तुझे ख़ुद सा जाने। और कुछ महज़ पयामी ही ख़ुदा का जाने, … Read more