या सय्यिदी हबीबी ख़ैरुल अनाम आक़ा

या सय्यिदी हबीबी  ख़ैरुल अनाम आक़ा अपने सलामियों का, ले लो सलाम आक़ा। आए हैं हाथ ख़ाली, भर दो हुज़ूरे आली, मांगे हैं आज तुमसे, मंगतों की ख़स्ता हाली। रहमत की सुबह आक़ा, रहमत की शाम आक़ा। या सय्यिदी हबीबी, ख़ैरुल अनाम आक़ा… या रसूलल्लाह… सल्ले-अला… या हबीबी… तुमसे ज़्यादा प्यारी, जान भी नहीं हमारी, … Read more