या ग़ौस-उल-आज़म आपके दर लगा हूँ मैं

या ग़ौस-उल-आज़म आपके दर लगा हूँ मैं कुछ ग़म नहीं है मुझको अगर नारसा हूँ मैं बेहीला बे-वसीला हूँ बेताब-ओ-नातवाँ इमदाद तुम करोगे मेरी जानता हूँ मैं ग़ौस-उल-आज़म शाह-ए-जीलाँ मझधार में नैया है सदक़ा मौला अली आओ मेरी लाज निभा जाओ तू लजपाल ते मैं लज तेरी लगियां दी लज्ज पाळीं वे मीराँ मैं नीवां … Read more