या ग़ौस-उल-आज़म आपके दर लगा हूँ मैं
कुछ ग़म नहीं है मुझको अगर नारसा हूँ मैं
बेहीला बे-वसीला हूँ बेताब-ओ-नातवाँ
इमदाद तुम करोगे मेरी जानता हूँ मैं
ग़ौस-उल-आज़म शाह-ए-जीलाँ
मझधार में नैया है
सदक़ा मौला अली आओ
मेरी लाज निभा जाओ
तू लजपाल ते मैं लज तेरी
लगियां दी लज्ज पाळीं वे मीराँ
मैं नीवां मेरा मीराँ उंचा
उंचयां दे संग लाई
सदक़े जां एहना उंचयां तों
जेहना नीवयां नाल निभाई
बर्बाद मुझे कर दे
तूफ़ान का इरादा है
कश्ती मेरी डुबोने को
हर मौज आमादा है
मजबूर बहुत हूँ मैं
ऐसे में तुम आ जाओ
सदक़ा मौला अली आओ
मेरी लाज निभा जाओ
मैं भी रहम के क़ाबिल हूँ
दुख दर्द का मारा हूँ
फ़रियाद सुनो इमदाद करो
आख़िर मैं तुम्हारा हूँ
करो नज़र-ए-करम मीराँ
मेरे काम बना जाओ
सदक़ा मौला अली आओ
मेरी लाज निभा जाओ
दुनिया में बता दीजो
और कौन हमारा है
अब राह-ए-ख़ुदा सुन लीजो सदा
मैंने तुमको पुकारा है
हसनैन के जानी हो
मेरी बिगड़ी बना जाओ
सदक़ा मौला अली आओ
मेरी लाज निभा जाओ
ख़ाकी पे शाह-ए-जीलाँ
रहमत की नज़र कर दो
सांस रुकने लगा आया वक़्त-ए-निज़ाअ
मीराँ को ख़बर कर दो
बख़्शिश मेरी हो जाए
सूरत तो दिखा जाओ
सदक़ा मौला अली आओ
मेरी लाज निभा जाओ