रसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी !
रसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी ! अस्सलाम अस्सलाम अस्सलाम अस्सलाम अस्सलाम अस्सलाम सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली ! रसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी ! सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली ! वो शाह हो या कोई गदागर ग़ुलाम बनता तेरा वो आ कर जो देख ले तेरी ख़ुश-ख़िसाली रसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी ! सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली ! रसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी … Read more