La ilaha illallah Lyrics

La ilaha illallah Lyrics

 

La ilaha illallah – Lyrical Salim Sulaiman

 

La ilaha illallah hu
La ilaha illallah
La ilaha illallah

Muhahmmad ur rasool allah

 

La ilaha illallah hu
La ilaha illallah
La ilaha illallah

Muhahmmad ur rasool allah

 

A million faces around the world
But one thing is the same
In there eyes i can see a light
Calling out your name

 

Har din har raat mein kayi mojzaat hain
Har zarre mein chhupi kayi qaynat hain

 

In your light i can feel the love
It’s all that i need
When i am alone
I can here your voice
Deep inside of me

 

Ya khuda tu ibtida tu inteha
Sajde me tu dua me tu
bas tu hi tu hi Meri panah

 

La ilaha illallah hu
La ilaha illallah
La ilaha illallah

Muhahmmad ur rasool allah

 

La ilaha illallah hu
La ilaha illallah
La ilaha illallah

Muhahmmad ur rasool allah

 

Ya khuda you’re the answer
You’re the one that i seek
You’re the shelter from the rain
You’re the strength when i’m weak

 

Azal se chali hai jo teri sachchayi hai
Roushani ye jo chhayi hai noor ki parchhayi hai

 

In your light i can feel your love
It’s all that i see
You’re the beat and the harmony
That’s inside of me

Ya khuda, ya khuda

Ya khuda
tu ibtida
tu inteha
Sajde me tu
dua me tu
bas tu hi tu hi
Meri panah

 

Ya khuda, ya khuda

Ya khuda
tu ibtida
tu inteha
Sajde me tu
dua me tu
bas tu hi tu hi
Meri panah

 

La ilaha illallah hu
La ilaha illallah
La ilaha illallah

Muhahmmad ur rasool allah

 

La ilaha illallah hu
La ilaha illallah
La ilaha illallah

Muhahmmad ur rasool allah

 

La ilaha illallah hu
La ilaha illallah
La ilaha illallah

Muhahmmad ur rasool allah

 

 

सजदा ए तिलावत का बयान👇

सवाल👇
सजदा ए तिलावत किसे कहते हैं,

जवाब👇
क़ुरआन में चौदह (14) मक़ामात ऐसे हैं के जिनके पढ़ने या सुनने से सजदा वाजिब हो जाता है उसे सजदा ए तिलावत कहते हैं,

सवाल👇
सजदा ए तिलावत का तरीक़ा क्या है,

जवाब👇
सजदा ए तिलावत का मसनून तरीक़ा ये है के खड़ा हो कर अल्लाहू अकबर कहता हुआ सजदा में जाए और कम से कम तीन (3) बार सुब्हाना रब्बीयल आला कहे फिर अल्लाहू अकबर कहता हुआ खड़ा हो जाए बस, ना उसमें अल्लाहू अकबर कहते हुए हाथ उठाना है और ना उसमें तश्हहुद (यानी अत्तहीयात दुरूद शरीफ़ व दुआ) है और ना सलाम,
📚 आलम गीरी,
📚 दुर्रेमुख़्तार,
📚 बहारे शरीअत,

सवाल👇
अगर बैठकर सजदा किया तो सजदा अदा होगा या नहीं,

जवाब👇
अदा हो जाएगा मगर मसनून यही है के खड़े होकर सजदा में जाए और सजदा के बाद फिर खड़ा हो,
📚 रद्दुलमौहतार,
📚 बहारे शरीअत,

सवाल👇
सजदा ए तिलावत के शराइत क्या हैं,

जवाब👇
सजदा ए तिलावत के लिए तहरीमा के सिवा वो तमाम शराइत हैं जो नमाज़ के लिए हैं, मसलन तहारत (पाकी) सतरे औरत, इस्तक़बाले क़िब्ला, और नियत वग़ैरह,

सवाल👇
सजदा ए तिलावत की नियत किस तरह की जाती है,

जवाब👇
नियत की मेंने सजदा ए तिलावत की अल्लाह तआला के वास्ते मुंह मेरा तरफ़ कअबा शरीफ़ के अल्लाहू अकबर,

सवाल👇
उर्दू ज़बान में आयते सजदा का तर्जमा पढ़ा तो सजदा वाजिब होगा या नहीं,

जवाब👇
उर्दू या किसी ज़ुबान में आयते सजदा का तर्जमा पढ़ने और सुनने से भी सजदा वाजिब होता है,
📚 आलम गीरी,
📚 बहारे शरीअत,

सवाल👇
क्या आयते सजदा पढ़ने के बाद फ़ौरन सजदा करना वाजिब होता है,

जवाब👇
अगर आयते सजदा नमाज़ के बाहर पढ़ी है तो फ़ौरन सजदा कर लेना वाजिब नहीं हां बेहतर है के फ़ौरन करले और वुज़ू हो तो ताख़ीर (देर करना) मकरूहे तन्ज़ीही है,
📚 फ़तावा रज़वियह, शरीफ़,

सवाल👇
अगर नमाज़ में आयते सजदा पढ़ी तो क्या हुक्म है,

जवाब👇
अगर नमाज़ में आयते सजदा पढ़ी तो फ़ौरन सजदा कर लेना वाजिब है, तीन (3) आयत से ज़्यादा की ताख़ीर (देर) करेगा तो गुनाहगार होगा, और अगर फ़ौरन नमाज़ का सजदा कर लिया यानी आयते सजदा के बाद तीन (3) आयत से ज़्यादा ना पढ़ा और रुकू करके सजदा कर लिया तो अगरचे सजदा ए तिलावत की नियत न हो सजदा अदा हो जाएगा,
📚 बहारे शरीअत,

सवाल👇
एक मजलिस में सजदा की एक आयत को कई बार पढ़ा तो एक सजदा वाजिब होगा या कई सजदे,

जवाब👇
एक मजलिस में सजदा की एक आयत को बार बार पढ़ने या सुनने से एक ही सजदा वाजिब होता है,
📚 दुर्रेमुख़्तार,
📚 रद्दुलमौहतार,

सवाल👇
मजलिस में आयत पढ़ी या सुनी और सजदा कर लिया फिर उसी मजलिस में वही आयत पढ़ी या सुनी तो दूसरा सजदा वाजिब होगा या नहीं,

जवाब👇
दूसरा सजदा नहीं वाजिब होगा वही पहला सजदा काफ़ी है,
📚 दुर्रेमुख़्तार,

सवाल👇
मजलिस बदलने और ना बदलने की सूरतें क्या हैं,

जवाब👇
दो एक लुक़्मा खाना, दो एक घूंट पीना, खड़ा हो जाना, दो एक क़दम चलना, सलाम का जवाब देना, दो एक बात करना, और मस्जिद या मकान के एक गोशा से दूसरे गोशा की तरफ़ चलना, इन तमाम सूरतों में मजलिस न बदलेगी, हां अगर मकान बड़ा है जैसे शाही महल तो ऐसे मकान में एक गोशा से दूसरे में जाने से बदल जाएगी, और तीन (3) लुक़्मे खाना, तीन घूंट पीना, तीन कल्मे बोलना, तीन क़दम मैदान में चलना और निकाह या ख़रीद व फ़रोख़्त करना, इन तमाम सूरतों में मजलिस बदल जाएगी,
📚 आलम गीरी,
📚 ग़ुनियातुत्तालिबीन,
📚 दुर्रेमुख़्तार,
📚 बहारे शरीअत,
📗 अनवारे शरीअत, उर्दू, सफ़ह 82/83/84)

चांद का मसला 🔥

आज के दिन कुछ मुसलमानों की बीपी हाई रहेगी

वजह ये रहेगी के हिन्द में चांद नज़र आया कि नही

ताकि शहादत लाने के लिए भागदौड़ कर सकें 🔥

भले रमज़ान शरीफ में एक तरावीह भी न पढ़ पाएं हो और एक रोज़ा भी ना रखा हो 🔥

जैसे ही कहीं से चाँद दिखने की खबर आती है ये निकल पड़ते है शहादत लाने के लिए

अब चाहे फ़ज़्र के बाद सबको रोज़ा ही क्यों ना खुलवाना पड़े

अस्तगफिरूल्लाह

जबकि हुज़ूर इरशाद फरमाते है-

चांद देखे बिना रमजान के रोजे शुरू ना करो ओर चांद देखे बगैर रमजान खत्म ना करो। अगर मतला अब आलूद हो अब्र हो यानी बादल छाए हो तो महीने के 30 दिन पूरे कर लो।
( 📚 मुस्लिम 1842, बुखारी 1906, इब्ने माजा-1654 )

ओर हमने भी बचपन में 25 साल पहले वो वक़्त देखा है जब 80 किलोमीटर के फ़ासले पर एक ही दिन ईद हुई और उसी दिन रोज़ा भी रखा गया था

जब हमारे नबी का हमें 30 कि गिनती पूरी करने का हुक्म है तो तुम काहे अपना बीपी बढ़ा रहे हो जबर्दस्ती चांद को उखाड़ लाने के लिए

मुझे एतराज़ ये है उनसे कि जब शाबान उल मुअज़्ज़म में 30 की गिनती पूरी करते हो तो

रमजान शरीफ में क्या दिक्कत है उनको

जब उस महीने में इतनी भागदौड़ नही तो इस महीने में इतनी भागदौड़ क्यों

 

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