दरे ख़्वाजा पे सवाली को खड़ा रहने दो
सर नदामत से झुका है तो झुका रहने दो
मुझ को मिल जाएगा सदक़ा मैं चला जाऊँगा
कासा-ए-दिल मेरा क़दमों में पड़ा रहने दो
दरे ख़्वाजा पे सवाली को खड़ा रहने दो
सर नदामत से झुका है तो झुका रहने दो
छोड़ कर आप का दर अब मैं कहाँ जाऊँगा
इस गदा को इसी साए में पड़ा रहने दो
दरे ख़्वाजा पे सवाली को खड़ा रहने दो
सर नदामत से झुका है तो झुका रहने दो
ख़ुद ही फरमाएँगे मुजरिम पे वो रहमत की नज़र
मुझ को ख़्वाजा की अदालत में खड़ा रहने दो
दरे ख़्वाजा पे सवाली को खड़ा रहने दो
सर नदामत से झुका है तो झुका रहने दो
रोज़े महशर ये गुनाहगार के काम आएगा
वारसी रंग चढ़ा है तो चढ़ा रहने दो
दरे ख़्वाजा पे सवाली को खड़ा रहने दो
सर नदामत से झुका है तो झुका रहने दो
अर्ज़ करता हूँ मैं रोज़ाना ये ख़्वाजा से ख़लील
अपनी रहमत से जहाँ मेरा सजा रहने दो
दरे ख़्वाजा पे सवाली को खड़ा रहने दो
सर नदामत से झुका है तो झुका रहने दो