ग़ुलाम-ए-रज़ा हूँ मैं और हूँ ग़ुलाम-ए-अख़्तर

ग़ुलाम-ए-रज़ा हूँ मैं और हूँ ग़ुलाम-ए-अख़्तर
सर पे मेरे दामन है मेरे पीर अख़्तर

सरकार-ए-मदीना से निस्बत मिली हमको
पहुँचा हूँ बरेली में मैं आशिक़-ए-अख़्तर

चेहरा है सरापा इल्म-ओ-हिकमत का देखो
मुफ़्ती-ए-आज़म नाइ़ब हैं वो सरकार अख़्तर

शान-ए-रज़ा-ओ-अख़्तर क्या शान तुम्हारी है
मुन्किर भी परेशान है देख कर शहज़ादे अख़्तर

‘आज़म’ की दुआ इतनी मक़बूल ख़ुदा करना
सदा रहे हम पर साया-ए-हुज़ूर अख़्तर

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