क्या ही ज़ौक़ अफ़ज़ा शफ़ाअत है तुम्हारी वाह वाह लिरिक्स | Kya Hi Zauk Afza Shafaat Hain Tumhari Wah Wah Lyrics
क्या आप Kya Hi Zauk Afza Shafaat Hain Tumhari Wah Wah Naat Lyrics की तलाश में हैं? यह एक बहुत ही बुलंद पाया और शाहकार नात शरीफ है जिसे चौदहवीं सदी के मुजद्दिद, इमाम-ए-अहले सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान (रहमतुल्लाह अलैह) ने लिखा है।
इस कलाम की रदीफ़ “वाह वाह” है, और हर शेर में आला हज़रत ने हुज़ूर-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की किसी शान, मोजिज़े या रहमत का ज़िक्र करके उस पर दिल की गहराइयों से “वाह वाह” कहा है। यह कलाम नातिया शायरी और इश्क़-ए-रसूल का एक बेमिसाल नमूना है।
Naat Info (नात की जानकारी)
| कलाम | क्या ही ज़ौक़ अफ़ज़ा शफ़ाअत है तुम्हारी वाह वाह |
| शायर (Poet) | आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान (र.अ.) |
| किताब (Book) | हदाइक़-ए-बख़्शिश (Hadaiq-e-Bakhshish) |
| भाषा | उर्दू (Urdu) |
Kya Hi Zauk Afza Shafaat Hain Tumhari Wah Wah Lyrics in Roman English
Kya hi zauk afza shafa’at hai tumhari, wah wah
Qarz leti hai gunah, parhezgari, wah wah
Khaama-e-qudrat ka husn-e-dastkaari, wah wah
Kya hi tasveer apne pyaare ki sanwaari, wah wah
Ungliyan hain faiz par, toote hain pyaase jhoom kar
Naddiyan Panjab-e-rehmat ki hain jaari, wah wah
Noor ki khairaat lene daudte hain mehr-o-maah
Uthti hai kis shaan se gard-e-sawaari, wah wah
Mujrimon ko dhoondti phirti hai rehmat ki nigaah
Taali’-e-bargashta! teri saazgaari, wah wah
Sadqe is in’aam ke, qurbaan us ikraam ke
Ho rahi hai dono aalam mein tumhari, wah wah
Paara-e-dil bhi na nikla dil se tohfe mein ‘Raza’
Un sagaan-e-koo se itni jaan pyaari, wah wah
Kya Hi Zauk Afza Shafaat Hain Tumhari Wah Wah Lyrics in Hindi
क्या ही ज़ौक़ अफ़ज़ा शफ़ाअत है तुम्हारी, वाह वाह
क़र्ज़ लेती है गुनाह, परहेज़गारी, वाह वाह
ख़ामा-ए-क़ुदरत का हुस्न-ए-दस्तकारी, वाह वाह
क्या ही तस्वीर अपने प्यारे की सँवारी, वाह वाह
उँगलियाँ हैं फ़ैज़ पर, टूटे हैं प्यासे झूम कर
नदियाँ पंजाब-ए-रहमत की हैं जारी, वाह वाह
नूर की ख़ैरात लेने दौड़ते हैं मेहर-ओ-माह
उठती है किस शान से गर्द-ए-सवारी, वाह वाह
मुजरिमों को ढूँढती फिरती है रहमत की निगाह
तालि-ए-बरगश्ता! तेरी साज़गारी, वाह वाह
सदक़े इस इनआम के, क़ुर्बान उस इकराम के
हो रही है दोनों आलम में तुम्हारी, वाह वाह
पारा-ए-दिल भी न निकला दिल से तोहफ़े में ‘रज़ा’
उन सگان-ए-कू से इतनी जान प्यारी, वाह वाह
Kya Hi Zauk Afza Shafaat Hain Tumhari Wah Wah Lyrics in Urdu (اردو میں)
کیا ہی ذوق افزا شفاعت ہے تمہاری واہ واہ
قرض لیتی ہے گنہ پرہیزگاری واہ واہ
خامۂ قدرت کا حسنِ دستکاری واہ واہ
کیا ہی تصویر اپنے پیارے کی سنواری واہ واہ
انگلیاں ہیں فیض پر ٹوٹے ہیں پیاسے جھوم کر
ندیاں پنجابِ رحمت کی ہیں جاری واہ واہ
نور کی خیرات لینے دوڑتے ہیں مہر و مہ
اٹھتی ہے کس شان سے گردِ سواری واہ واہ
مجرموں کو ڈھونڈتی پھرتی ہے رحمت کی نگاہ
طالعِ برگشتہ! تیری سازگاری واہ واہ
صدقے اس انعام کے قربان اس اکرام کے
ہو رہی ہے دونوں عالم میں تمہاری واہ واہ
پارۂ دل بھی نہ نکلا دل سے تحفے میں رضاؔ
ان سگانِ کو سے اتنی جان پیاری واہ واہ
Kya Hi Zauk Afza Shafaat Hain Tumhari Wah Wah Lyrics in Gujarati (ગુજરાતીમાં)
ક્યા હી ઝૌક અફઝા શફા’અત હૈ તુમ્હારી, વાહ વાહ
કર્ઝ લેતી હૈ ગુનાહ, પરહેઝગારી, વાહ વાહ
ખામા-એ-કુદરત કા હુસ્ન-એ-દસ્તકારી, વાહ વાહ
ક્યા હી તસ્વીર અપને પ્યારે કી સંવારી, વાહ વાહ
ઉંગલિયાં હૈં ફૈઝ પર, ટૂટે હૈં પ્યાસે ઝૂમ કર
નદિયાં પંજાબ-એ-રહમત કી હૈં જારી, વાહ વાહ
નૂર કી ખૈરાત લેને દૌડ़તે હૈં મહર-ઓ-માહ
ઉઠતી હૈ કિસ શાન સે ગર્દ-એ-સવારી, વાહ વાહ
મુજરિમોં કો ઢૂઁઢતી ફિરતી હૈ રહમત કી નિગાહ
તાલિ’-એ-બરગશ્તા! તેરી સાઝગારી, વાહ વાહ
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