आओ आओ सर को झुकाएँ आक़ा का रौज़ा नज़र आया
दिल में इश्क़-ए-नबी को जगाएँ आक़ा का रौज़ा नज़र आया
मेरी आँखें होगी मुनव्वर रौज़े को जब देखूँगा
दिल ये ख़ुशी से बोल उठेगा आक़ा का रौज़ा नज़र आया
दिल की ये अरमान है आक़ा तैबा की उन गलियों में
मेरे दिल को मैं समझाऊँ कि आक़ा का रौज़ा नज़र आया
अल्लाह अल्लाह उनकी जाली चूमूँ मैं इन होंटों से
शुक्र ख़ुदा का करते बोलूँ आक़ा का रौज़ा नज़र आया
जल्द घड़ी वो आएगी रब्ब-ए-तआला की रहमत से
दिल ये तमीम का बोल उठेगा आक़ा का रौज़ा नज़र आया
शायर: तमीम