क्या हुस्न-ए-इफ़्तिख़ार है याद-ए-हुसैन में लिरिक्स
क्या हुस्न-ए-इफ़्तिख़ार है याद-ए-हुसैन में,
हर अश्क एक बहार है याद-ए-हुसैन में।
दरबार-ए-मुस्तफ़ा की फ़ज़ीलत न पूछिये,
इंसान का वक़ार है याद-ए-हुसैन में।
हर अश्क कलमा पढ़ते हैं बर दीन-ए-मुस्तफ़ा,
क्या हुस्न-ए-यादगार है याद-ए-हुसैन में।
वल्लाह सर-ब-सर है वो ईमान का सुकून,
जो क़ल्ब-ए-बेक़रार है याद-ए-हुसैन में।
दिल ज़िंदगी में कैसे न हो ख़ुल्द आशियाँ,
इस्लाम की बहार है याद-ए-हुसैन में।