आ गए आ गए मुस्तफ़ा आ गए

आ गए आ गए मुस्तफ़ा आ गए
आज दुनिया में ख़ैर-उल-वरा आ गए

बज़्म-ए-कौनैन में हर तरफ़ शोर है
मुस्तफ़ा आ गए मुज्तबा आ गए

अर्श वाले मुबारक देने लगे
फ़र्श वालो हबीब-ए-ख़ुदा आ गए

कौन देता है देने को मुँह चाहिए
देने वाला है सच्चा हमारा नबी
क्या ख़बर कितने तारे खिले छुप गए
पर न डूबे न डूबा हमारा नबी

हर तरफ़ है नियाज़ी सामान ईद का
मुस्तफ़ा आ गए मुज्तबा आ गए

हर तरफ़ तीरगी थी न थी रौशनी
आप आए तो सब को मिली रौशनी

ख़िलक़त अव्वलीन ख़ातम-उल-मुर्सलीन
आप पहली किरण आख़िरी रौशनी

मुस्तफ़ा की मैं तौसीफ़ करता रहा
उम्र भर मेरे घर में रही रौशनी

तो दो जहान का उजाला हमारा
है बड़ी शान वाला हमारा

आ गए आ गए मुस्तफ़ा आ गए
आज दुनिया में ख़ैर-उल-वरा आ गए

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