आज ही अपने रब को मना लो लिरिक्स

आज ही अपने रब को मना लो लिरिक्स (Hindi)
आज ही अपने रब को मना लो
ज़िंदगी का भरोसा नहीं है
नार-ए-दोज़ख़ से ख़ुद को बचा लो
ज़िंदगी का भरोसा नहीं है

चाँदनी चार दिन की है, लोगो!
ये जवानी भी फ़ानी है सुन लो
आख़िरत अपनी अच्छी बना लो
ज़िंदगी का भरोसा नहीं है

क़ब्र में जा के रोना पड़ेगा
ख़ाक पर तुम को सोना पड़ेगा
मौत से पहले ख़ुद को संभालो
ज़िंदगी का भरोसा नहीं है

चाहिए गर नबी की शफ़ाअत
मत करो फिर नबी की इहानत
उनकी उल्फ़त दिलों में बसा लो
ज़िंदगी का भरोसा नहीं है

नात-ख़्वाँ: अज़मत रज़ा भागलपुरी

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