bahut-kathin-hai-dagar-panghat-ki-lyrics

बहुत कठिन है डगर पनघट की
कैसे मैं भर लाऊँ मधवा से मटकी

पनिया भरन को मैं जो गई थी
दौड़ झपट मोरी मटकी पटकी

बहुत कठिन है डगर पनघट की
‘ख़ुसरव’ निज़ाम के बल-बल जइए

लाज रखो मेरे घूँघट पट की
कैसे मैं भर लाऊँ मधवा से मटकी

बहुत कठिन है डगर पनघट की

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