फलक के नज़ारों ज़मीन की बहारों हज़ूर आ गए हैं

फलक के नज़ारों ज़मीन की बहारों हज़ूर आ गए हैं
हज़ूर आ गए हैं हज़ूर आ गए हैं

फलक के नज़ारों ज़मीन की बहारों
सब ईदें मनाओ हज़ूर आ गए हैं

उठो ग़म के मारों चलो बे-सहारों
ख़बर ये सुनाओ हज़ूर आ गए हैं

अनोखा निराला वो ज़ी-शान आया
वो सारे रसूलों का सुल्तान आया

अरे कज कुलाओ अरे बादशाहों
निगाहें झुकाओ हज़ूर आ गए हैं

हज़ूर आ गए हैं हज़ूर आ गए हैं

हुआ चार-सू रहमतों का बसेरा
उजाला उजाला सवेरा सवेरा

हलीमा को पहुँची ख़बर आमिना की
मेरे घर में आओ हज़ूर आ गए हैं

हज़ूर आ गए हैं हज़ूर आ गए हैं

हवाओं में जज़्बात हैं मरहबा की
फ़ज़ाओं में नग़्मात सल्ले अला की

दुरूदों के गजरे सलामों के तोहफ़े
ग़ुलामों सजाओ हज़ूर आ गए हैं

हज़ूर आ गए हैं हज़ूर आ गए हैं

समां है सना-ए-हबीब-ए-ख़ुदा का
ये मिलाद है सरवर-ए-अंबिया का

नबी के ग़दाओं सब एक दूसरे को
गले से लगाओ हज़ूर आ गए हैं

हज़ूर आ गए हैं हज़ूर आ गए हैं

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