सुनते हो बेकसों की फ़रियाद गौस-ए-आज़म
मज़लूम तुमसे पाते हैं दाद गौस-ए-आज़म
जल्वों से अपने करके आबाद गौस-ए-आज़म
खादिम का दिल बना दो बग़दाद गौस-ए-आज़म
सुनते हो बेकसों की…
मेरे वतन से मुझको बग़दाद में बुलाकर
बन्द-ए-अलम से करदो आज़ाद गौस-ए-आज़म
सुनते हो बेकसों की…
अपने गुलाम का घर रौशन करो कदम से
चमका तुम्हारे दम से बग़दाद गौस-ए-आज़म
सुनते हो बेकसों की…
कहदो ज़बां से जो कुछ मांगेगा वो मिलेगा
करदो गदा का अपने दिलशाद गौस-ए-आज़म
सुनते हो बेकसों की…
बहर-ए-अलम में मेरे बेड़े पे है तबाही
डूबा मुझे बचा लो फ़रियाद गौस-ए-आज़म
सुनते हो बेकसों की…
लिल्लाह अब ख़बर लो कदमों से दूर रह कर
‘क़ासिम’ की ज़िंदगी है बर्बाद गौस-ए-आज़म
सुनते हो बेकसों की…