की की न कीता यार ने इक यार वास्ते

की की न कीता यार ने इक यार वास्ते
रब महफ़िलाँ सजाइयाँ ने सरकार वास्ते

दिल याद लई बनाया ए, ता’रीफ़ लई ज़ुबाँ
अखियाँ बनाइयाँ सोहणे दे दीदार वास्ते

कइयाँ नूँ रोज़ होंदे नें दीदार आप दे
कई कई तरस दे रहंदे नें दीदार वास्ते

सदक़ा नबी दी आल दा बख़्शे ख़ुदा शिफ़ा
मँगो दु’आवाँ मेरे जए बीमार वास्ते

गुज़रे, नियाज़ी ! ज़िंदगी ‘इश्क़-ए-नबी दे विच
ना’ताँ मैं पढ़ दा रहवाँ मिठन मँठार वास्ते

शायर: मौलाना अब्दुल सत्तार नियाज़ी
ना’त-ख़्वाँ: अल-हाज ख़ुर्शीद अहमद, ओवैस रज़ा क़ादरी, सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनी

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