क्या आप Kuchh Aisa Kar De Mere Kirdgar Aankhon Mein Naat Lyrics की तलाश में हैं? यह एक बेहद रूहानी और आशिक़ाना कलाम है जिसे शहज़ादा-ए-आला हज़रत, हुज़ूर मुफ़्ती-ए-आज़म-ए-हिन्द, अल्लामा मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान ‘नूरी’ (रहमतुल्लाह अलैह) ने लिखा है।
इस कलाम में शायर अपने रब से दुआ कर रहा है कि “ऐ मेरे परवरदिगार! कुछ ऐसा कर दे कि मेरे महबूब (नबी-ए-करीम) का चेहरा हमेशा मेरी आँखों में बसा रहे।” हर शेर में हुज़ूर के दीदार की तड़प, आपकी मुहब्बत और मदीने की हसरत का खूबसूरत इज़हार है।
Naat Info (नात की जानकारी)
| कलाम | कुछ ऐसा कर दे, मेरे किर्दगार ! आँखों में |
| शायर (Poet) | मुफ़्ती-ए-आज़म-ए-हिन्द मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान ‘नूरी’ |
| प्रसिद्ध नात-ख़्वाँ | ओवैस रज़ा क़ादरी (Owais Raza Qadri) |
| भाषा | उर्दू (Urdu) |
कुछ ऐसा कर दे, मेरे किर्दगार ! आँखों में
हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में
न कैसे ये गुल-ओ-गुंचे हों ख़्वार आँखों में
बसे हुए हैं मदीने के ख़ार आँखों में
वो नूर दे, मेरे परवरदिगार ! आँखों में
कि जल्वा-गर रहे रुख़ की बहार आँखों में
उन्हें न देखा तो किस काम की हैं ये आँखें
कि देखने की है सारी बहार आँखों में
फ़रिश्तो ! पूछते हो मुझ से किस की उम्मत हो
लो देख लो, ये है तस्वीर-ए-यार आँखों में
पिया है जाम-ए-मोहब्बत जो आप ने, ‘नूरी’ !
हमेशा इस का रहेगा ख़ुमार आँखों में