कुछ करें अपने यार की बातें
कुछ दिले-दिग़दार की बातें
हम तो दिल अपना दे ही बैठे हैं
अब ये क्या इख़्तियार की बातें
मैं भी गुज़रा हूँ दौरे-उल्फ़त से
मत सुना मुझ को प्यार की बातें
अहले-दिल ही यहाँ नहीं कोई
क्या करें हाले-ज़ार की बातें
पी के जामे-मोहब्बते-जानाँ
अल्लाह अल्लाह ! ख़ुमार की बातें
मर न जाना मता-ए-दुनिया पर
सुन के तू मालदार की बातें
यूँ न होते असीरे-ज़िल्लत तुम
सुनते गर होशियार की बातें
मोअतदिल सुन्नियों की फ़ितरत है
करते हैं चार यार की बातें
फ़ित्ना तफ़्ज़ीलियत का फैला है
चल करें यारे-ग़ार की बातें
हर घड़ी वज्द में रहे “अख़्तर”
कीजिए उस दयार की बातें