मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर है

मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर है
तैबा बड़ी दूर आक़ा, तैबा बड़ी दूर, हाँ
अल्लाहुम्मा सल्ले अला सय्यिदिना मुहम्मदिन

मेरे आक़ा मेरे सरवर, मेरा बेड़ा पार हो
तालिब हूँ मैं आपका शाहा, मुझ को अता दीदार हो
नज़रे करम सरकार आक़ा, नज़रे करम सरकार हो
आपका मंगता आपका सائل, हाज़िरे दरबार हो

तैबा बड़ी दूर आक़ा, तैबा बड़ी दूर, हाँ
तैबा बड़ी दूर…

मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर है
तैबा बड़ी दूर आक़ा, तैबा बड़ी दूर
अल्लाहुम्मा सल्ले अला सय्यिदिना मुहम्मदिन

रो रो वक़्त गुज़ारूँ कैसे, अब तो बुलावा आ जाए
मुज़्दा मुझ को हाज़िरी का, काश कोई सुना जाए
दिल को सुकून मयस्सर हो और, रूह को चैन भी आ जाए
मैं ही तैबा जा पहुँचूँ या, दिल में तैबा समा जाए

तैबा बड़ी दूर आक़ा, तैबा बड़ी दूर, हाँ
तैबा बड़ी दूर…

मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर है
तैबा बड़ी दूर आक़ा, तैबा बड़ी दूर, हाँ
अल्लाहुम्मा सल्ले अला सय्यिदिना मुहम्मदिन

रहमते आलम तेरा लक़ब है, तेरी ऊंची शान है
सारा आलम तेरा भिखारी, तू सब का सुल्तान है
मुझ से ग़म के मारों का तो, तुझ पे ही बस मान है
पास बुला लो अब तो आक़ा, मुद्दत से अरमान है

तैबा बड़ी दूर आक़ा, तैबा बड़ी दूर, हाँ
तैबा बड़ी दूर…

मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर है
तैबा बड़ी दूर आक़ा, तैबा बड़ी दूर
अल्लाहुम्मा सल्ले अला सय्यिदिना मुहम्मदिन

जब भी क़ाफ़िला देखूँ तो ही, तैबा नगर को जाता है
फूट फूट के दिल रोता है, मुझ को बड़ा तड़पाता है
मेरे दिल को पल भर भी फिर, चैन ज़रा न आता है
रुख़ तैबा की जानिब कर के, बस यह कहता जाता है

तैबा बड़ी दूर आक़ा, तैबा बड़ी दूर, हाँ
तैबा बड़ी दूर…

मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर है
तैबा बड़ी दूर आक़ा, तैबा बड़ी दूर, हाँ
अल्लाहुम्मा सल्ले अला सय्यिदिना मुहम्मदिन

बड़ी दुआएं मांगी हम ने, हम भी तैबा जाएंगे
तैबा जाकर कहना आक़ा, कब वो हम को बुलाएंगे
जब वो हम को बुलाएंगे फिर, हम भी मदीने जाएंगे
रो रो हाल सुनाएंगे और, मिल कर सब ये गाएंगे

तैबा बड़ी दूर आक़ा, तैबा बड़ी दूर, हाँ
तैबा बड़ी दूर…

मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर है
तैबा बड़ी दूर आक़ा, तैबा बड़ी दूर
अल्लाहुम्मा सल्ले अला सय्यिदिना मुहम्मदिन

मेरे शाहा आप के दर की, कुल कायनात सवाली है
सारे जहाँ का तू है दाता, तू उम्मत का वाली है
तुझ से मांगने वाला आक़ा, जाता न कोई खाली है
तेरे अहमद और हसन की, तुझ बिन खस्ता हाली है

तैबा बड़ी दूर आक़ा, तैबा बड़ी दूर, हाँ
तैबा बड़ी दूर…

मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर है
तैबा बड़ी दूर आक़ा, तैबा बड़ी दूर, हाँ
अल्लाहुम्मा सल्ले अला सय्यिदिना मुहम्मदिन

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