ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता
स्रोत :
पुस्तक : paiman-e-gazal-avval (पृष्ठ 146)
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ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता
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पुस्तक : paiman-e-gazal-avval (पृष्ठ 146)