नबी की सबसे ऊंची शान

 

नबी की सबसे ऊंची शान
ये कहकशां ये समंदर भी बात करते हैं
हंसी बहारों के मंज़र भी बात करते हैं
नबी का ज़िक्र परदों तलक नहीं महदूद
मेरे रसूल से कंकर भी बात करते हैं

 

प्यारे नबी की ज़ात से मोमिन ना होना अनजान
कितना बुलंद है उनका रुतबा सुन लो ये फ़रमान
सब नबियों के नबी है आक़ा कहता है कुरआन

नबी की सबसे ऊंची शान

 

प्यारे नबी की ज़ात से मोमिन ना होना अनजान
कितना बुलंद है उनका रुतबा सुन लो ये फ़रमान
सब नबियों के नबी है आक़ा कहता है कुरआन

नबी की सबसे ऊंची शान

 

फूल खिले हैं डाली-डाली महके सारे गुलशन
सच है मुहम्मद के सदक़े में दोनों जहां हैं रौशन
क़ुरआं के हर इक पारे में है रब का ऐलान

नबी की सबसे ऊंची शान

 

रब ने बख्शी सब नबियों को मेरे नबी की इमामत
फ़र्श से लेकर आर्श तलक है चलती उनकी हुकूमत
मेरे नबी को रब ने बनाया दो जग का सुल्तान

नबी की सबसे ऊंची शान

 

शाहे अरब को रब ने बख़्शा इज़्ज़त का वो ताज
ये बतलाओ उनके अलावा किसको हुई मेराज
आप तो अ़र्श पे बन के गए हैं अल्लाह के मेहमान

नबी की सबसे ऊंची शान

 

उम्मत की ख़ातिर आक़ा ने पेट पे बांधा पत्थर
उनकी गिज़ा थी जौ की रोटी टूटी चटाई बिस्तर
यूं तो उनके क़दमों में है सोने की चट्टान

नबी की सबसे ऊंची शान

 

घटा ए नूर बरसती थी आसमानों से
बड़े हसीन थे नूरानी रात के लम्हे
किसी को ऐसी बुलंदी कहां मैयस्सर है
जहां कोई नहीं पहुंचा वहां नबी पहुंचे

नबी की सबसे ऊंची शान

 

बा-सद खुलूस बा-सद अहतराम भेजता है
कलाम भेजता है और प्याम भेजता है
बयान कर नहीं सकता मैं मर्तबा उनका
रसूले हक़ पे ख़ुदा भी सलाम भेजता है

नबी की सबसे ऊंची शान

 

दिखाई राह सदाक़त की भटके लोगों को
मेरे नबी ने सुनहरे उसूल पेश किए
ज़माना करता रहा अपने ज़ुल्म की बारिश
मगर जवाब में आक़ा ने फूल पेश किए

नबी की सबसे ऊंची शान

 

महकते हैं ज़मीन ओ आसमां मौसम महकता है
जिधर देखो उधर इस्लाम का परचम महकता है
मक़ाम ए सरवरे कौनैन देखो तीस पारों में
नबी के नाम की खुशबू से दो आलम महकता है

नबी की सबसे ऊंची शान

 

प्यारे नबी की ज़ात से मोमिन ना होना अनजान
कितना बुलंद है उनका रुतबा सुन लो ये फ़रमान
सब नबियों के नबी है आक़ा कहता है कुरआन

नबी की सबसे ऊंची शान

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