सबके हाजत रवा गरीब नवाज़

सबके हाजत रवा गरीब नवाज़
हर मर्ज़ की शिफ़ा गरीब नवाज़।

ग़मज़दों ने कहा गरीब नवाज़,
बेकसों की सदा गरीब नवाज़।

सबके हाजत रवा गरीब नवाज़…

हर वो साहिल मुराद पाता है,
जो भी कहता ‘या गरीब नवाज़’।

सबके हाजत रवा गरीब नवाज़…

तेरे दर पर जबीं झुकाते हैं,
हिंद के औलिया, गरीब नवाज़।

सबके हाजत रवा गरीब नवाज़…

जिनका कोई नहीं ज़माने में,
उनका है आसरा गरीब नवाज़।

सबके हाजत रवा गरीब नवाज़…

ख़ाक-ए-अजमेर खूब है ‘ख़ाकी’,
चूम ले कह के ‘या गरीब नवाज़’।

सबके हाजत रवा गरीब नवाज़…

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