अजब रंग पर है बहार-ए-मदीना

अजब रंग पर है बहार-ए-मदीना
‘अजब रंग पर है बहार-ए-मदीना
के सब जन्नतें हैं निसार-ए-मदीना

सरकार का मदीना, सरकार का मदीना

में पहले पहल जब मदीने गया था
तो थी दिल की हालत तड़प जाने वाली
वो दरबार सचमुच मेरे सामने था
अभी तक तसव्वुर था जिसका ख़याली

सरकार का मदीना, सरकार का मदीना

में एक हाथ से दिल संभाले हुए था
तो थी दूसरे हाथ में उनकी जाली
दुआ के लिए हाथ उठते तो कैसेना ये हाथ खाली ना वो हाथ खाली

सरकार का मदीना, सरकार का मदीना

खुला है सभी के लिए बाब-ए-रेहमत
वहाँ कोई रुतबे में अदना ना आली
मुरादों से दामन नहीं कोई खाली
कतारें लगाए खड़े हैं सवाली

सरकार का मदीना, सरकार का मदीना

जो पूछा किसी ने के तुम नज़र करनेको क्या ले गए थे तो तफ्सील सुन लो
था नातों का एक हार अश्कों के मोती
दुरूदों के गजरे, सलामों की डाली

सरकार का मदीना, सरकार का मदीना

मदीना मदीना, हमारा मदीना
हमें जानों दिल से है प्यारा मदीना
सुहाना सुहाना, दुलारा मदीना
हर आशिक़ की आँखों का तारा मदीना

खुदा गर क़यामत में फरमाए मांगो
लगाएंगे दीवाने नारा मदीना

सरकार का मदीना, सरकार का मदीना

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