तेरे दामने करम में जिसकी नींद आ गई है

 

तेरे दामने करम में जिसकी नींद आ गई है
जो फना ना होगी ऐसी उसे जिंदगी मिली है।

मुझे क्या पड़ी किसी से करु अरज़ मुड्ढा माई
मेरी लौ तो बस उन्हीं के दर्द से लगी है।

वो जहां भर के दाता मुझे फेर देंगे खाली
मेरी तौबा ऐ खुदा ये मेरे नफ़्स की बड़ी है।

माई मारू तो मेरे मौला ये मलिका से कह दे
कोई इस को मत जगाना अभी आंख लगी है।

मैं गुनहगार हूं और बड़े शहीदों की चाहत
तू मगर करीम है जो तेरी बंदा परवारी है।

तेरी याद थपकी देकर मुझे अब साहस दे
मुझे जागते हुए यूं बड़ी देर हो गई है।

तेरा दिल चाहता अख्तर इसी इंतजार में है
कि अभी भी उम्मीद तेरे दर से आ रही है।

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