तेरे होते जनम लिया होता
फिर कभी तो तुझे मिला होता
काश ! मैं संग-ए-दर तेरा होता
तेरे क़दमों को चूमता होता
तू चला करता मेरी पलकों पर
काश ! मैं तेरा रास्ता होता
ज़र्रा होता जो तेरी राहों का
तेरे तलवों को छू लिया होता
लड़ता फिरता मैं तेरे आ’दा से
तेरी ख़ातिर मैं मर गया होता
तेरे मस्कन के गिर्द शाम-ओ-सहर
बन के मंगता मैं फिर रहा होता
तू कभी तो मुझे भी तक लेता
तेरे तकने पे बिक गया होता
तू कभी तो मेरी ख़बर लेता
तेरे कूचे में घर किया होता
तू जो आता मेरे जनाज़े पर
तेरे होते मैं मर गया होता
चाँद होता मैं आसमानों पर
तेरी उंगली से कट गया होता
होता ताहिर तेरे फ़क़ीरों में
तेरी दहलीज़ पर पड़ा होता